नरसिंह



नरसिंह भगवान विष्णुया १०गु अवतारय् छगू ख। थ्व अवतारय् भगवान विष्णुं बच्छि मनु व बच्छि सिंहया अवतार कया बिज्याइ।
स्वया दिसँ
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शास्त्रय् दसुअग्निपुराणम् — अध्यायः ३१[१] त्रिविक्रमाय रामाय वैकुण्ठाय नराय च ।३१.००५ नमस्कृत्य प्रवक्ष्यामि यत्तत्सिध्यतु मे वचः ॥३१.००५ वराह नरसिंहेश वामनेश त्रिविक्रम ।३१.००६ हरग्रीवेश सर्वेश हृषीकेश हराशुभम् ॥३१.००६ अपराजितचक्राद्यैश्चतुर्भिः परमायुधैः ।३१.००७ अग्निपुराणम् — अध्यायः ६३[२] च्छिन्द छिन्द भिन्द भिन्द विदारय विदारय परमन्त्रान् ग्रस ग्रस भक्षय भक्षय भूतान् त्रायस त्रायस हूं फट्सुदर्शनाय नमः ॥ अभ्यर्च्य चक्रं चानेन रणे दारयेते रिपून् ॥६३.००२ ओं क्षौं नरसिंह उग्ररूप ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल स्वाहा ॥ नरसिंहस्य मन्त्रोयं पातालाख्यस्य वच्मि ते(२)[३] ।६३.००३ ओं क्षौं नमो भगवते नरसिंहाय प्रदीप्तसूर्यकोटिसहस्रसमतेजसे वज्रनखदंष्ट्रायुधायं स्फुटविकटविकीर्णकेसरसटाप्रक्षुभितमहार्णवाम्भोददुन्दुभिनिर्घोषाय सर्वमन्त्रोत्तारणाय एह्येहि भगवन्नरसिंह पुरुषपरापरब्रह्मसत्येन स्फुर स्फुर विजृम्भ विजृम्भ आक्रम गर्ज गर्ज मुञ्च मुञ्च सिंहनादान् विदारय विदारय विद्रावय विद्रावय आविश अग्निपुराणम् — अध्यायः ७३[४] अभ्यर्च्य चक्रं चानेन रणे दारयते रिपून् ।। २ ।। ओं क्षों नरसिंह उग्ररूप ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल स्वाहा ।। नरसिंहस्य मन्त्रोयं पातालाख्यस्य वच्मि ते ।। दुर्गा चालीसा[५] रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥९॥ धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़कर खम्बा॥१०॥ रक्षा करि प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥११॥ लिधंसा
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