भजन


शास्त्रय् दसुSanskrit lessons[१] - ईश्वरं गुरुं च भजस्व = ईश्वर और गुरु को भजो। - यहाँ ईश्वर का और गुरु का भजन (तीसरी वस्तु) में एकत्रीकरण होता है। ईश्वर का भजन गुरु के भजन के सापेक्ष नहीं है। इसलिए ईश्वर का भजन करो, और गुरु का भजन करो, यह दो स्वतन्त्र वाक्य बन जाते हैं। भजन क्रिया में दो द्रव्य ईश्वर और गुरु का समुच्चय हुआ है, उसको "च" ने बताया। - रक्तो घटः पटश्च = घड़ा और कपड़ा दोनों लाल हैं। अष्टाध्यायी हिन्दी व्याख्या सहितम् — द्वितीयः अध्यायः[२] [२|२|२८] तेन सहेति तुल्ययोगे - तुल्ययोग में वर्तमान `सहऄ शब्द का तृतीयान्त सुबन्त के साथ बहुत्रीहि समास होता है। | सुपुत्रः (पुत्र के साथ)। सच्छात्रः (छात्र के साथ। सकर्मकर (नौकर के साथ) [२|२|२९] चार्थे द्वन्द्वः - च अर्थ में वर्तमान अनेक सुबन्तों का परस्पर समास होता है। | ईश्वरं गुरुं च भजस्व (ईश्वर और गुरु की सेवा करो)- इस वाक्य में ईश्वर गुरु रूप पदार्थ परस्पर निरपेक्ष हैं, वे एक दूसरे की अपेक्षा नही करते। यहाँ दोनो का स्वतन्त्र रूप से भजन क्रियारूप एक पदार्थ में अन्वय होता है। अतः यहाँ च का अर्थ है-समुच्चय। [२|२|३०] उपसर्जनं पूर्वम्| - समास में उपसर्जन का प्रयोग पहिले होता है। हरि ङि अधि में अधि उपसर्जन है, अतः प्रकृत सूत्र से उसका प्रयोग पहिले होने पर अधि हरि ङि रूप बनता है। यहाँ प्रातिपादिक होने पर रुप्-लोप हो अधि हरि रूप बनने पर अव्ययीभाव होने के कारण प्राप्त सु का लोप होकर अधिहरि रूप सिद्ध होता है। आञ्जनेयसहस्रनामावलिः[३] ॐ नेति- नेति- गम्याय नमः । ॐ वैकुण्ठ भजन प्रियाय नमः । ॐ गिरीशाय नमः । ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका (दयानन्दसरस्वतीविरचिता) — १. ईश्वरप्रार्थनाविषयः[४] यस्य॑ छा॒याऽमृतं॒ यस्य॑ मृ॒त्युः कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम॥५॥ ( यजु॰२५.१३) (य आत्मदाः) य आत्मदा विद्याविज्ञानप्रदः, (बलदाः) यः शरीरेन्द्रियप्राणात्ममनसां पुष्ट्युत्साहपराक्रमदृढत्वप्रदः, (यस्य विश्वे उपासते प्रशिषं यस्य देवाः) यं विश्वेदेवाः सर्वे विद्वांस उपासते यस्यानुशासनं च मन्यन्ते, (यस्य छायाऽमृतम्) यस्याश्रय एव मोक्षोऽस्ति, यस्याच्छायाऽकृपाऽनाश्रयो मृत्युर्जन्ममरणकारकोऽस्ति, (कस्मै देवाय हविषा विधेम) तस्मै कस्मै प्रजापतये ‘प्रजापतिर्वै कस्तस्मै हविषा विधेमेति’। (श॰ब्रा॰७.३.१.२०) सुखस्वरूपाय ब्रह्मणे देवाय प्रेमभक्तिरूपेण हविषा वयं विधेम, सततं तस्यैवोपासनं कुर्वीमहि॥५॥ <p style="text-ali… लिधंसा | |||||||||||||||||||||||||
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