सिन्ध
विकिपिडिया नं
| Sindh | |
| किपा:Flag of Sindh.PNG | किपा:Pakistan Sindh.PNG |
| देय् |
|
| राजधानी • कोअर्डिनेट |
Karachi • 24°31′12″N 67°01′48″E / 24.52°N 67.03°E |
| तःधंगु नगर | Karachi |
| जनसंख्या (2008) • जनघनत्त्व |
49,978,000 (Estimate) • 216/km² |
| क्षेत्रफल |
140,914 km² |
| ई लागा | पिएसटि (UTC+५) |
| मू भाषा | Sindhi, Urdu, Saraiki English |
| थाय् | Province |
| • जिल्ला | • 23 |
| • नगर | • 160 |
| • युनियन काउन्सिल | • 1094[१] |
| पलिस्था • गभर्नर/कमिस्नर • मुख्यमन्त्री • विधानसभा (थाय्) |
01 July, 1970 • Dr. Ishrat-ul-Ibad Khan • Syed Qaim Ali Shah • Provincial Assembly (168) |
| जाःथाय् | Government of Sindh |
सिन्ध पाकिस्तानया प्यंगु प्रान्तय् छगू ख। सिन्ध धाःगु खँग्वः संस्कृतया सिन्धु खुसिया नामं वःगु ख।
धलः |
[सम्पादन] मौसम
थ्व प्रान्तया मौसम ताहा न्वइगु व सुक्खा जु। समुद्र नापंया थासय् धाःसा मौसम अप्व सुक्खा मजु। ताहान्वइगु मौसम(मे-जुन)य् थनया तापक्रम अप्वैगु व चिकुला(डिसेम्बर ज्यानुवरी)इ मौसम हल्का म्हो जुइगु खने दु। जैकबाबाद थःगु तापक्रमया निंतिं नांजाः। जुलाई व अगस्तय् मौनसूनया मौसम जुइ। सिन्धय् औसतय् वार्षिक न्हे इञ्च वा वै। सिन्धया उत्तरया कोह खैर थरया बाज़ क्षेत्र समुद्र सतह स्वया ६००० फुट च्वे ला व थन चिकुलाय् आपालं च्वापु गाइगु या।
[सम्पादन] तारीख़
ज़माना क़दीम सिंध अपने दामन में दुनिया का क़दीम तरीन तहज़ीबी विरसा समवय हवे है। तहक़ीक़ी शवाहिद बताते हैं कि दर उड़ वी आबादकारों से क़बल यहां(7000 कि म) मुख़तलिफ़ क़बाइल आबाद थे । दराड़वीयों ने तक़रीबन 4000 कि म में वादी-ए-सिंध में मुस्तकिल सु़कूनत इख़्तयार की। मोहन जोदाड़ो के खन्डरात बताते हैं कि दर उड़ वी अपने इल्म-ओ-फ़न में यकता, काश्तकारी और तिजारत से आगाह महज़्ज़ब क़ौम थे। जिन्हों ने पाँच हज़ार साल क़बल (3000 कि म) वादी-ए-सिंध को इल्मी, फनी, और तिजारती लिहाज़ से अपनी हम असर मिस्री, आशुरी और सामी तहज़ीबों के शाना बह शाना ला खड़ा किया। वादी-ए-सिंध के दामन में कई शहरी मराकज़ कायम थे, जिन्हें बाकायदा मनसूबा बंदी के तहत तामीर किया गया था। मौजूदा ग्रिड सिस्टम के क़ाअदे के मुताबिक आबाद इन शहरों में शाहर अं पुख्ता थीं, और निकासी-ओ-फ़राहमी-ए-आब का जे़रे ज़मीन निज़ाम मौजूद था।मगर फिर किसी नाक़ाबिल-ए-दरयाफ़त वजह से वादी-ए-सिंध के ये अज़ीम मराकज़ तबाही से दो चार हो गए। मोहन जो दाड़ो और दीगर दर उड़ वी मराकज़ की तबाही की क्या वजूहात थीं, उस पर मुहक़्कक़ीन में इखतिलाफ़ पाया जाता है। बाज़ उसे क़ुदरती आफ़ात और सैलाब क़रार देते हैं, जब कि बाज़ मुहक़्कक़ीन के नज़दीक वसती एशिया और मशरक़ी यूरोप से आर याओं की फ़ौजी यलग़ार ने ये तहज़ीब नेस्त-ओ-नाबूद करदी। आर याओं ने यहां हिंद।आरयाआई तहज़ीब की बुनियाद डाली, जो दरिया ए सरस्वती और दरयाए गंगा के किनारों तक फैली हुई थी। ये तहज़ीब 1500 कि म में अपने उरूज पर थी। हिंद।आरयाआई तहज़ीब (वैदिक सवीलाएज़ीशन 1700-500 कि म) ने हिंदूस्तान के मज़हब, रसोम, मा शर्त-ओ-रहन सहन पर इन मिट नुक़ूश छोड़े हैं।
सिंध: कलहोड़ा दौर का फ़न-ए-ताअमीर
बर्र-ए-सगीर के फ़न-ओ-सक़ाफ़त, ख़ास तौर पर फ़न-ए-ताअमीर के ज़िमन में मुहक़्कक़ीन की ये शिकायत आम है कि इलाक़ाई रुजहानात पर ना तो रिसर्च की जाती है और ना ही इन नादिर-ओ-नायाब नुक़ूश का कोई मुस्तनद रिकार्ड आने वाली नस़्लों के लिए महफ़ूज़ किया जाता है। इस शिकायत के अज़ाले की ख़ातिर आज से तीन बरस पहले सिंधी सक़ाफ़त के अमीन इदारे सिंध आरकाईओज़ ने एक भारी ज़िम्मेदारी क़बूल की जिसे माहिरीन फ़न-ए-ताअमीर के इलावा तारीख़ के तलबा ने भी बहुत सराहा और बेचैनी से इस मनसूबे के नताइज का इंतिज़ार करने लगे।
हाल ही में इस सिलसिले का तहक़ीक़ी मवाद एक किताब की शक्ल में मंज़र-ए-आम पर आया है। Kalhora Period Architecture जिसके मोल्लफ़ हैं सय्यद हाकिम अली शाह बुख़ारी।
मवाद की तरतीब-ओ-पेशकश में उन्हें सिंध यूनीर्वसिटी के प्रोफ़ैसर ग़ुलाम मुहम्मद लाखो और डाक्टर कलीम उल्लाह लाशारी की मदद और भरपूर तआवुन हासिल रहा है।
सक़ाफ़ती विरसे को महफ़ूज़ रखने वाले माहिरीन बताते हैं कि ये विरसा दो तरह का होता है: मुरई और ग़ैर मुरई। मुरई अशीया वो हैं जिन्हें हम ठोस शक्ल में अपने सामने देख सकते हैं मसलन फ़न-ए-ताअमीर, मसूरी, सनम तराशी, नक़्क़ाशी, कन्दा कारी, ज़र दोज़ी वग़ैरा, जबकि ग़ैर मुरई सक़ाफ़ती विरसे में शेअर-ओ-अदब वग़ैरा आते हैं। ठोस शक्ल में नज़र आने वाला सक़ाफ़ती विरसा ख़ुद बख़ुद महफ़ूज़ नहीं रह सकता। अगर क़दीम रोमन आसार, यूनानी खन्डरात, प्राचीन भारत के मंदिर और जनूबी अमरीका में क़ुबुल-ए-मसीह के तारीख़ी आसार को बेरहम फितरत के मुक़ाबल बेसहारा छोड दिया गया होता तो आज हमें कद़ मा के बारे में कुछ भी मालूम ना होता।
सिंधी तहज़ीब की बहुत सी तारीख़ी निशानियां मौसमी शुदा यदि की नज़र हो कर हमेशा के लिए नाबूद हो चुकी हैं, लेकिन जो आसार अभी मौजूद हैं इन को रिकार्ड पर लाना और उन के तहफ्फुज़ की जद्द-ओ-जहद करना, सिंध आरकाईओज़ के मक़ासद में शामिल है और इस ग़रज़ से कई तहक़ीक़ी मंसूबों पर काम हो रहा है। जे़र-ए-नज़र किताब ऐसे ही एक रिसर्च प्राजैक्ट के नतीजे में सामने आई है।
पाक-ओ-हिंद के फ़न-ए-ताअमीर पर यूं तो गुज़शता दो सदीयों से काम हो रहा है लेकिन ये मुहक़्कक़ीन यूरोप से ताल्लुक रखते थे और उन की तमाम तर अर्क़ रेज़ी के बावजूद ये नुक्ता उन पर अयां ना हो सका कि वो हिंदूस्तानी फ़न-ए-ताअमीर को यूरोप के रवाईती क्लासिकी पैमानों से नाप रहे हैं। इस सिक्किम का एहसास पहली बार 1920 की दुहाई में हुआ लेकिन तब तक सक़ाफ़ती मुताले के ज़िमन में कई और नज़री मसाइल सर उठा चुके थे, मसलन यही कि एक दौर के तर्ज़-ए-तामीर को दूसरे दूर से ममी्यज़ करने के लिए हम एक वाज़िह ख़त-ए-तक़सीम कैसे खींच सकते हैं। मिसाल के तौर हर क्या हम सल़्तनत दौर के फ़न-ए-ताअमीर को एक लकीर खींच कर मुग़लिया दौर के फ़न-ए-ताअमीर से अलग कर सकते हैं?
जे़र-ए-नज़र किताब में ये मसअला मुग़लिया और कलहोड़ा दौर के ख़त-ए-इम्तियाज़ की सूरत में नज़र आता है, क्योंकि तारीख़ी तौर पर जब कलहोड़ा दौर का सूरज तलूअ हो रहा था तो सल्तनत-ए-मुग़लिया का आफ़ताब ग़ुरूब हो रहा था लेकिन अदब, आर्ट, कल्चर और तहज़ीब की तक़सीम दो टोक अंदाज़ में नहीं हो सकती क्योंकि एक दौर के असरात अगले दौर के अंदाज़ दूर तक मार करते हुए नज़र आते हैं। सिंध अरकाईओज़ के डायरेक्टर इक़बाल नफीस ख़ान की मदद से मुसन्निफ़ हाकिम अली शाह बुख़ारी ने इस प्राजैक्ट का क़रीब से मुताला किया और एक ऐसी किताब तहरीर की जो ना सिर्फ स्कालरों बल्कि आम कारईन के लिए भी दिलचस्पी का बाइस बने और कलहोड़ा दौर के हवाले से पढ़ने वालों के ज़हन में सिंध के क़दीम और जदीद तर्ज़-ए-तामीर की मुख़तलिफ़ जहतों को रोशन करे।
गढ़ी के मुक़ाम पर मियाँ नसीर मुहम्मद की मस्जिद जो इमतदाद-ए-ज़माना से खनडर में तबदील होचुकी थी, लेकिन हाल ही में उसकी ताअमीर-ए-नौ हुई है
कलहोड़ा दौर के फ़न-ए-ताअमीर पर बड़ी तख़्ती के एक सौ सत्ताईस सफहात पर मुशतमिल ये किताब सिंध आरकाईओज़ ने ख़ुद शाय की है। मुख़तलिफ़ इमारतों की रंगीन और स्याह-ओ-सफ़ैद तसावीर हासिल करने के लिए कराची के जवान साल फ़ोटो गिरा फिर वक़ार अशरफ़ की ख़िदमात हासिल की गई हैं। तालिब-ए-इल्मों की क़ुव्वत-ए-ख़रीद को मद्द-ए-नज़र रखते हुए किताब की क़ीमत सिर्फ 400 रुपये मुकर्रर की गई है जो कि किताब पर आने वाली असल लागत से बहुत कम महसूस होती है।
[सम्पादन] प्रशासनिक विभाजन
सिन्ध प्रान्त प्रशासनिक कथं क्वे बिया तःगु २३गु जिल्लाय् विभक्त दु
- बदीन जिल्ला, सिन्ध प्रान्त
- ठट्टा जिल्ला, सिन्ध प्रान्त
- हैदराबाद जिल्ला, सिन्ध प्रान्त
- जैकबाबाद जिल्ला, सिन्ध प्रान्त
- खैरपुर जिल्ला, सिन्ध प्रान्त
- दादू जिल्ला, सिन्ध प्रान्त
- टनडो उल्ला यार जिल्ला, सिन्ध प्रान्त
- टनडो मुहम्मद खान जिल्ला, सिन्ध प्रान्त
- सानघड जिल्ला, सिन्ध प्रान्त
- शिकारपुर जिल्ला, सिन्ध प्रान्त
- सिखर जिल्ला, सिन्ध प्रान्त
- उम्रकोट जिल्ला, सिन्ध प्रान्त
- कंबर अली खान जिल्ला, सिन्ध प्रान्त
- कराची जिल्ला, सिन्ध प्रान्त
- कशमोर जिल्ला, सिन्ध प्रान्त
- घोटकी जिल्ला, सिन्ध प्रान्त
- लाड काना जिल्ला, सिन्ध प्रान्त
- मटिया री जिल्ला, सिन्ध प्रान्त
- मीरपुरखास जिल्ला, सिन्ध प्रान्त
- नोशीरोफीरोज जिल्ला, सिन्ध प्रान्त
- नवाबशाह जिल्ला, सिन्ध प्रान्त