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इक्ष्वाकु

विकिपिडिया नं
नेपाललिपि परिक्षण: 𑐠𑑂𑐰 𑐥𑑁𑐫𑐵 𑐣𑐾𑐥𑐵𑐮𑐮𑐶𑐥𑐶𑐂 𑐥𑐬𑐶𑐎𑑂𑐲𑐞 𑐥𑑁 𑐧𑑂𑐰𑐣𑐾𑐟: इक्ष्वाकु 𑐟𑐶𑐫𑐵𑐡𑐶𑐳𑑄𑑋

इक्ष्वाकु वेदकथं मनुयागु वंशजयाम्ह छम्ह हिन्दू पात्र खः।

शास्त्रय् दसु

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अनुक्रमणिका[]

  • कर्कटी,2/4/155/2/4,स्त्री/
  • इक्ष्वाकु,2/4/156/1/1,स्त्री/
  • कटुतुम्बी,2/4/156/1/2,स्त्री/

अष्टाध्यायी हिन्दी व्याख्या सहितम् — द्वितीयः अध्यायः[] [२|४|६१] न तौल्वलिभ्यः तौल्वलि आदि से विहित युवप्रत्यय का लोप नहीं होता। | तौल्वलिः पिता, तौल्वलायनः पुत्रः। [२|४|६२] तद्राजस्य बहुषु तेनैवास्त्रियाम् - स्त्रीलिंग को छोड़कर अन्य लिंग (पुँल्लिङ्ग और नपुंसकलिङ्ग) में बहुत्व अर्थ में तद्राज प्रत्यय का लोप होता है। | इक्ष्वाकु शब्द से राजा या अपत्य अर्थ में अञ् प्रत्यय हो अजादि-वृद्धि आदि होकर ऐक्ष्वाकव रूप बनता है।यहाँ बहुवचन की विविक्षा में प्रकृत सूत्र से तद्राज प्रत्यय अञ् का लोप हो जाता है। [२|४|६३] यस्कादिभ्यो गोत्रे - `यरकऄ आदि से पहले बहुत्वार्थक गोत्रप्रत्ययों का लोप होता है, स्त्रीलिंग को छोड़कर यदि यह बहुत्व उसी गोत्रप्रत्यय से जन्य हो। | यस्काः (यास्कः, यास्कौ, यस्काः)। लभ्याः (लाभ्याः, लाभ्योः, लभ्याः)

भेलसंहिता शारीरस्थानम् (भिन्नपाठः)[] ४.२२। प्रदीप्यते नृणां कोष्ठे सति वेन्धनपूरितः।
इक्ष्वाकु-*कोशम्[*शोक]-आस्थाय यथा दीपः स्थिरेऽम्भसि॥ ४.२३। तिष्ठते तिमिरे सक्तो न तथा चलितेऽम्भसि।

मत्स्यपुराणम् — अध्यायः १२[] सूत उवाच। अथान्विषन्तो राजानं भ्रातरस्तस्य मानवाः। इक्ष्वाकु प्रमुखा जग्मु स्तदाशरवणान्तिकम्।। १२.१ ।। ततस्ते दद्रृशुः सर्वे वडवामग्रतः स्थिताम्।

लिधंसा

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  1. विकिस्रोतः – अनुक्रमणिका
  2. विकिस्रोतः – अष्टाध्यायी हिन्दी व्याख्या सहितम्/द्वितीयः अध्यायः
  3. विकिस्रोतः – भेलसंहिता शारीरस्थानम् (भिन्नपाठः)
  4. विकिस्रोतः – मत्स्यपुराणम्/अध्यायः १२